दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो स्टेशनों पर अवैध वेंडिंग गतिविधियों पर सख्ती करने का बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में संसद में केंद्र सरकार द्वारा पारित जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 [Jan Vishwas (Amendment) Act, 2026] के तहत अब बिना अनुमति सामान बेचने पर ₹5000 तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 की धारा 73 के तहत इस नए प्रावधान ने ₹100 से ₹400 तक के पुराने जुर्माने की जगह अब ₹5,000 तक के कहीं ज़्यादा सख्त सिविल जुर्माने का नियम लागू कर दिया है।
क्या है DMRC का नया नियम ?
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, अभी के नियम पहले के मुकाबले काफी सख्त है।
- मेट्रो ट्रेनों या परिसर के अंदर सामान बेचना या प्रदर्शित करना सख्त मना है।
- पहले जुर्माना: ₹100 से ₹400 तक था लेकिन अब नहीं।
- नियम तोड़ने वालों पर अब ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- यह नियम मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 में किए गए संशोधनों के अंतर्गत आता है।
DMRC का नया नियम का उद्देश्य
यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और मेट्रो परिसर को साफ-सुथरा रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
- यात्रियों को भीड़ और असुविधा से बचाना।
- मेट्रो परिसर को साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाए रखना।
- अनधिकृत व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाना।
DMRC का आधिकारिक बयान
DMRC अधिकारियों ने कहा कि मेट्रो स्टेशन केवल यात्रा के लिए हैं, न कि बाजार के लिए। अवैध वेंडिंग से यात्रियों को परेशानी होती है और सुरक्षा मानकों पर भी असर पड़ता है। नया नियम सुनिश्चित करेगा कि मेट्रो परिसर अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित रहे।
अन्य जुर्मानों में भी बढ़ोतरी
इसी संशोधन के तहत कई अन्य नागरिक उल्लंघनों पर भी जुर्माना बढ़ाया गया है, जैसे-
- बिना लाइसेंस स्टॉल लगाने पर जुर्माना बढ़ा
- सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर कड़ी कार्रवाई
सरकार का यह कदम दिल्ली मेट्रो को और अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और यात्री-हितैषी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि, इससे छोटे वेंडरों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।


